पंचायती राज सचिव का नया कारनामा
देहरादून। उत्तराखंड में पंचायती राज सचिव की लगातार चिट्ठियों और आदेशों ने ब्लॉक प्रमुखों और जनता दोनों को उलझा दिया है। पहले चुनाव को लेकर रायता फैलाया गया, अब शपथ ग्रहण को लेकर।

शपथ ग्रहण का मामला और कन्फ्यूजन
ब्लॉक प्रमुखों में यह कन्फ्यूजन फैल गया है कि जो शपथ आज (29 अगस्त) ली गई वह असली है या 3 सितंबर को होने वाली शपथ। इसके बीच सोशल मीडिया पर भी चर्चा और हलचल बढ़ गई है।

आपदा का बहाना और सचिव का स्पष्टीकरण
सचिव महोदय ने पिछली चिट्ठी में शपथ तिथि में बदलाव का कारण आपदा बताया। अब नई चिट्ठी में लिखा गया है कि जहां शपथ हो चुकी है वहां दोबारा शपथ नहीं होगी, और जिन जगह आपदा के कारण शपथ नहीं हो पाई वहां 3 सितंबर को शपथ होगी। पंचायतीराज अनुभाग-1 की ओर से शुक्रवार को जारी संशोधित शासनादेश में जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित तिथियों के अनुसार सभी नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण और प्रथम बैठक समय पर संपन्न कराई जाए।
संशोधित आदेश के मुताबिक, पंचायत सदस्य, कनिष्ठ उप प्रमुख, ज्येष्ठ उप प्रमुख और प्रमुख क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण 3 सितंबर को होगा जबकि पहली बैठक 4 सितंबर को आयोजित की जाएगी। इसी प्रकार, जिला पंचायत के सदस्य, उपाध्यक्ष और अध्यक्ष 5 सितंबर को शपथ लेंगे और उनकी पहली बैठक 6 सितंबर को होगी। सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए और निर्धारित कार्यक्रम के तहत सभी पंचायतों का गठन सुचारू रूप से संपन्न हो। यह निर्णय प्रदेश में आई आपदा को देखते हुए पूर्व में जारी समय-सारणी में संशोधन के बाद लिया गया है।

सोशल मीडिया में हाहाकार
सोशल मीडिया में लोगों ने सचिव साहब की अलग-अलग चिट्ठियों को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। जनता और ब्लॉक प्रमुख यह समझ नहीं पा रहे कि कौन सा आदेश असली है। लोगों ने सवाल उठाया है कि जब मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी थी, तो सचिव या विभाग ने क्यों पहले से कदम नहीं उठाए। उत्तराखंड के पंचायती राज सचिव की यह कारवाही न केवल ब्लॉक प्रमुखों के लिए बल्कि जनता के लिए भी भ्रमित करने वाली रही।
