सिरोबगड़ में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद
पौड़ी गढ़वाल। पौड़ी गढ़वाल जिले का श्रीनगर इलाका लगातार हो रही बारिश और अलकनंदा नदी के बढ़ते जलस्तर से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-7) पर सिरोबगड़ के पास दो स्थानों पर मलबा आने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।

सुरक्षित जगहों पर रोके गए वाहन
यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात बरते हैं।

- श्रीनगर से रुद्रप्रयाग की ओर जा रहे वाहनों को फरासू के निकट सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया है।
- इसके अलावा कुछ वाहनों को कालियासौड़ पुलिस चौकी पर भी रोका गया है।
पुलिस लगातार यात्रियों से अपील कर रही है कि वे धैर्य बनाए रखें और बारिश कम होने तक जोखिम न उठाएं।
अलकनंदा का जलस्तर हाईवे तक पहुंचा
हिमालयी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश ने अलकनंदा नदी को उफान पर ला दिया है।
- गोवा बीच क्षेत्र में नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि पानी सीधे बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग तक आ गया।
- इससे सड़क पूरी तरह जलमग्न हो गई और आवागमन रुक गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की स्थिति हर साल मानसून में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार नदी का रौद्र रूप और खतरनाक हो गया है।
धारी देवी मंदिर क्षेत्र में खतरा
नदी का जलस्तर धारी देवी मंदिर परिसर तक भी पहुंच गया है।
- मंदिर को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
- मंदिर के आसपास बनी प्रसाद की दुकानों में पानी भर गया, जिसके चलते उन्हें भी बंद करवा दिया गया है।
- जल पुलिस और स्थानीय पुलिस लगातार भक्तों और आसपास मौजूद लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रही है और माइक से अनाउंसमेंट कर सतर्क रहने को कह रही है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
प्रशासनिक टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
- राजमार्ग से मलबा हटाने और यातायात सुचारू करने की कोशिशें की जा रही हैं।
- पुलिस और आपदा प्रबंधन दल मौके पर मुस्तैद हैं।
- यात्रियों और श्रद्धालुओं को फिलहाल यात्रा टालने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की जा रही है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों तक गढ़वाल मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इस चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों और श्रद्धालुओं से फिलहाल पहाड़ी मार्गों पर अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन और नदी-नालों में जलस्तर और बढ़ सकता है, ऐसे में सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।
